Wednesday, 9 December 2015

सिंहस्थ में क्यों नहीं होती शादियां और मांगलिक कार्य

वैशाख माह में जब सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में हो और सिंह राशि में बृहस्पति होता है तो ये स्थिति सिंहस्थ कहलाती है। ये स्थिति 22 अप्रैल से 21 मई तक रहेगी। इस दौरान विवाह और मंगल कार्य नहीं किए जाते हैं।
सिंह राशि का स्वामी सूर्य है और ये अग्रि तत्व की राशि है। इसका वर्ण क्षत्रिय है। इस राशि में देवताओं के गुरु बृहस्पति के होने से विवाह आदि मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। साथ ही सूर्य भी उस समय अपनी उच्च राशि मेष में होता है, सूर्य आत्मा का प्रतीक माना गया है, जब सूर्य अपनी उच्च राशि में होता है तो वो भी आत्मा की शुद्धि और अध्यात्म की ओर ले जाता है।
जब गुरु सिंह राशि में होता है तो दान, तप, यज्ञ, ब्रह्मचर्य और पूजा-पाठ आदी की भावनाएं और विचार मन में आते हैं। इन विचारों को दबा कर सांसारिक सुख, भोग और विलासिता में पडऩे से दोष और विकार पैदा होते हैं। इस समय अगर विवाह किया जाए तो इसके नकारात्मक प्रभाव के कारण विकृत और दोष पूर्ण संतान पैदा होती है। इन विकार और दोषों के प्रभाव से अगर विवाह सफल नहीं होते।
गुरु की ऐसी स्थिति वैराग्य उत्पन्न करती है। गुरु के प्रभाव से वियोग और विरोध की स्थिति बनती है। चूंकि वैवाहिक जीवन में विग्रह यानी विरोध की भावना नहीं होनी चाहिए। वैवाहिक जीवन प्रेम से आगे बढ़ता है, वैराग्य से नहीं इसलिए जब-जब सूर्य की राशि में गुरु होता है तब-तब शादी और मांगलिक काम नहीं किए जाते हैं।
अगर मांगलिक काम जरूरी ही हो तो दोष से बचने के लिए कुछ उपाय भी किए जा सकते हैं-
- कन्या का विवाह कुंभ के साथ करें फिर वर-वधु का विवाह करने से ये दोष खत्म हो जाता है।
- पीपल पेड़ के साथ विवाह कर, फेरे लेने से भी इस दोष का निवारण हो जाता है।
- गुरु के बीज मंत्र ऊं ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवे नम: के 19 हजार जप ब्राह्मण से करवाएं।
- पीले कपड़े में चने की दाल के साथ हल्दी की गांठ और सोना रख कर ब्राह्मण को दान दें।
- अपनी जन्म कुंडली और राशि अनुसार सोने की अंगूठी में पुखराज रत्न पहनें।

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