Tuesday, 22 December 2015

कितनी पत्नियां थीं अर्जुन की,महाभारत के युद्ध में कितने योद्धा मारे गए थे?

महाभारत के युद्ध में कितने योद्धा मारे गए थे?

महाभारत के स्त्री पर्व के एक प्रसंग में धृतराष्ट्र युधिष्ठिर से युद्ध में मारे गए योद्धाओं की संख्या पूछते हैं, तब युधिष्ठर कहते हैं कि इस युद्ध में 1 अरब 66 करोड़ 20 हजार वीर मारे गए हैं। इनके अलावा 24 हजार 165 वीरों का पता नहीं है। युधिष्ठिर बताते हैं कि जो वीर क्षत्रिय धर्म निभाते हुए मारे गए हैं, वे ब्रह्मलोक में गए हैं। जो युद्ध से भागते हुए मारे गए हैं, वे यक्षलोक में गए हैं।
जो वीर ईमानदारी से लड़ते हुए मारे गए हैं, वे अन्य पुण्यलोकों में गए हैं। जब धृतराष्ट्र ने युधिष्ठिर से पूछा कि तुम्हारे पास ऐसी कौन सी शक्ति है, जिससे तुम ये सब बातें जानते हो, तो युधिष्ठिर ने बताया कि वनवास के दौरान देवर्षि लोमश ने मुझे जो दिव्य दृष्टि दी थी, उसी की सहायता से यह गुप्त बातें मुझे पता चली हैं। 

4 पत्नियां थीं अर्जुन की

अर्जुन महाभारत के प्रमुख पात्रों में से एक थे। अर्जुन ने स्वयंवर जीत कर द्रौपदी को अपनी पत्नी बनाया था। इसके अलावा सुभद्रा का हरण कर उसके साथ विवाह किया था, ये बात तो हम सभी जानते हैं। लेकिन द्रौपदी व सुभद्रा के अलावा भी अर्जुन की दो पत्नियां और थीं, ये बात बहुत कम लोग जानते हैं।
ये हैं अर्जुन की दो अन्य पत्नियां
महाभारत के अनुसार, एक बार नियम भंग के कारण अर्जुन को 12 वर्ष के वनवास पर जाना पड़ा। वनवास के दौरान एक दिन जब अर्जुन गंगा में स्नान कर रहे थे, उसी समय नागकन्या उलूपी ने मोहित होकर उन्हें जल के भीतर खींच लिया। उलूपी का प्रेम देखकर अर्जुन ने उससे विवाह कर लिया। एक रात उलूपी के साथ रूक कर अर्जुन पुनः वनवास पर चले गए।
वनवास में घूमते-घू्मते अर्जुन मणिपुर पहुंच गए। वहां के राजा चित्रवाहन थे। उनकी कन्या का नाम चित्रांगदा था। चित्रांगदा को देखकर अर्जुन राजा चित्रवाहन के पास गए और उन्हें अपना परिचय देकर उनकी कन्या से विवाह का प्रस्ताव रखा। राजा चित्रवाहन ने खुशी-खुशी चित्रांगदा का विवाह अर्जुन से करवा दिया।

मर कर फिर से जीवित हो गए थे अर्जुन

युद्ध समाप्त होने के बाद पांडवों ने अश्वमेध यज्ञ किया। उस यज्ञ के घोड़े का रक्षक अर्जुन को बनाया गया। यज्ञ का घोड़ा घूमते-घूमते मणिपुर पहुंच गया। यहां की राजकुमारी चित्रांगदा से अर्जुन को बभ्रुवाहन नाम का पुत्र था। बभ्रुवाहन अपने पिता का स्वागत करना चाहता था, लेकिन अर्जुन ने उसे युद्ध करने के लिए कहा। उसी समय नागकन्या उलूपी भी वहां आ गई। उलूपी भी अर्जुन की पत्नी थी। अर्जुन व बभ्रुवाहन में युद्ध होने लगा। बभ्रुवाहन के तीरों से घायल होकर अर्जुन बेहोश होकर धरती पर गिर पड़े। तभी वहां बभ्रुवाहन की माता चित्रांगदा भी आ गई।
चित्रांगदा ने देखा कि अर्जुन जीवित नहीं है। बभ्रुवाहन ने भी जब देखा कि उसने अपने पिता की हत्या कर दी है तो वह भी शोक करने लगा। जब नागकन्या उलूपी ने बभ्रुवाहन को संजीवन मणि दी और उसे अर्जुन की छाती पर रखने के लिए कहा। मणि छाती पर रखते ही अर्जुन जीवित हो उठे। उलूपी ने बताया कि छल पूर्वक भीष्म का वध करने के कारण वसु (एक प्रकार के देवता) आपको श्राप देना चाहते थे। आपको वसुओं के श्राप से बचाने के लिए ही मैंने ही यह माया दिखलाई थी। 

जानिए महाभारत में कौन, किसका अवतार था?

पांचवे वेद के रूप में प्रसिद्ध महाभारत ग्रंथ के अधिकांश पात्र देवता व असुरों के अवतार थे। जानिए महाभारत में कौन किसका अवतार था-
भीष्म द्यौ नामक वसु के अवतार थे। भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में तथा शेषनाग ने बलराम के रूप में अवतार लिया था। देवगुरु बृहस्पति के अंश से द्रोणाचार्य का जन्म हुआ। अश्वत्थामा महादेव, यम, काल और क्रोध के सम्मिलित अंश से उत्पन्न हुए। रुद्र के एक गण ने कृपाचार्य के रूप में अवतार लिया। द्वापर युग के अंश से शकुनि का जन्म हुआ। यमराज ही विदुर के नाम से प्रसिद्ध हुए। कर्ण, सूर्य का अवतार था। युधिष्ठिर धर्म के, भीम वायु के, अर्जुन इंद्र के तथा नकुल व सहदेव अश्विनी-कुमारों के अंश से उत्पन्न हुए थे। रुक्मिणी के रूप में लक्ष्मीजी व द्रौपदी के रूप में इंद्राणी उत्पन्न हुई थीं। दुर्योधन कलियुग का तथा उसके सौ भाई पुलस्त्य वंश के राक्षस के अंश थे। अभिमन्यु, चंद्रमा के पुत्र वर्चा का अंश था। धृतराष्ट्र व पाण्डु गंधर्वों के अवतार थे। कुंती और माद्री के रूप में सिद्धि और घृतिका का जन्म हुआ था। मति का जन्म गांधारी के रूप में हुआ था।

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