श्रीरामचरित मानस का पांचवा अध्याय सुंदरकांड सफलता और शांति सबसे बड़ा
उदाहरण है। वानरों के सामने एक असंभव सी दिखने वाली चुनौती थी। सौ योजन
यानी करीब 400 किमी लंबा समुद्र लांघकर लंका पहुंचने की। जब वानरों के दल
में समुद्र लांघने के बात आई तो सबसे पहले जामवंत ने असमर्थता जाहिर की।
फिर अंगद ने कहा मैं जा तो सकता हूं, लेकिन समुद्र पार करके फिर लौट पाऊंगा
इसमें संदेह है। अंगद ने खुद की क्षमता और प्रतिभा पर ही संदेह जताया। ये
आत्म विश्वास की कमी का संकेत है।
जामवंत ने हनुमान को इसके लिए प्रेरित किया। हनुमान को अपनी शक्तियों की याद आ गईं और उन्होंने अपने शरीर को पहाड़ जैसा बड़ा बना लिया। आत्म विश्वास से भरकर वे बोले कि अभी एक ही छलांग में समुद्र लांघकर, लंका उजाड़ देता हूं और रावण सहित सारे राक्षसों को मारकर सीता को ले आता हूं।
अपनी शक्ति पर इतना विश्वास था हनुमान को। जामवंत ने कहा नहीं, आप सिर्फ सीता माता का पता लगाकर लौट आइए। हमारा यही काम है। फिर प्रभु राम खुद रावण का संहार करेंगे।
जामवंत ने हनुमान को इसके लिए प्रेरित किया। हनुमान को अपनी शक्तियों की याद आ गईं और उन्होंने अपने शरीर को पहाड़ जैसा बड़ा बना लिया। आत्म विश्वास से भरकर वे बोले कि अभी एक ही छलांग में समुद्र लांघकर, लंका उजाड़ देता हूं और रावण सहित सारे राक्षसों को मारकर सीता को ले आता हूं।
अपनी शक्ति पर इतना विश्वास था हनुमान को। जामवंत ने कहा नहीं, आप सिर्फ सीता माता का पता लगाकर लौट आइए। हमारा यही काम है। फिर प्रभु राम खुद रावण का संहार करेंगे।
हनुमान समुद्र लांघने के लिए, निकल गए। सुरसा और सिंहिका नाम की राक्षसियों ने रास्ता रोका भी, लेकिन उनका आत्म विश्वास कम नहीं हुआ।
हम जब भी किसी काम पर निकलते हैं तो अक्सर मन विचारों से भरा होता है। आशंकाएं, कुशंकाएं और भय भी पीछे-पीछे चलते हैं। हम अधिकतर मौकों पर अपनी सफलता को लेकर आश्वस्त नहीं होते। जैसे ही परिस्थिति बदलती है हमारा विचार बदल जाता है। ये काम में असफलता की निशानी है। अगर हम इन स्थितियों से गुजरते हैं तो साफ है कि हमारे मन में आत्म विश्वास की कमी है। सफलता के लिए सबसे जरूरी है आत्म विश्वास। जब तक हम खुद पर ही भरोसा नहीं करेंगे, हमारे प्रयास कभी सौ फीसदी नहीं होंगे।
हम जब भी किसी काम पर निकलते हैं तो अक्सर मन विचारों से भरा होता है। आशंकाएं, कुशंकाएं और भय भी पीछे-पीछे चलते हैं। हम अधिकतर मौकों पर अपनी सफलता को लेकर आश्वस्त नहीं होते। जैसे ही परिस्थिति बदलती है हमारा विचार बदल जाता है। ये काम में असफलता की निशानी है। अगर हम इन स्थितियों से गुजरते हैं तो साफ है कि हमारे मन में आत्म विश्वास की कमी है। सफलता के लिए सबसे जरूरी है आत्म विश्वास। जब तक हम खुद पर ही भरोसा नहीं करेंगे, हमारे प्रयास कभी सौ फीसदी नहीं होंगे।
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