शास्त्रों में महाभारत को पांचवा वेद कहा गया है। महाभारत की कथा
जितनी बड़ी है, उतनी ही रोचक भी है। इसके रचयिता महर्षि कृष्णद्वैपायन
वेदव्यास हैं। इस ग्रंथ में कुल एक लाख श्लोक है, इसलिए इसे शतसाहस्त्री
संहिता भी कहते हैं।
इसलिए नीचे आ गया युधिष्ठिर का रथ
महाभारत के द्रोण पर्व के अनुसार, श्रीकृष्ण ने पांडवों को गुरु द्रोण
की मृत्यु का उपाय सुझाया। इसके अनुसार, भीम ने अपनी ही सेना के
अश्वत्थामा नामक हाथी को मार डाला और द्रोणाचार्य के सामने जाकर जोर-जोर से
चिल्लाने लगे कि अश्वत्थामा मारा गया। अपने पुत्र की मौत की खबर सुनकर
आचार्य द्रोण को विश्वास नहीं हुआ।
तब उन्होंने धर्मराज युधिष्ठिर से इसके बारे में पूछा। युधिष्ठिर ने
ऊंचे स्वर में कहा कि अश्वत्थामा मारा गया और उसके बाद धीरे से बोले, किंतु
हाथी। इसके पहले युधिष्ठिर का रथ पृथ्वी से चार अंगुल ऊंचा रहता था, लेकिन
उस दिन असत्य मुंह से निकलते ही उनका रथ जमीन से सट गया।
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