Monday, 14 December 2015

कृष्ण के ससुर है शनिदेव



ज्येष्ठ की अमावस्या की दें पैदा हुए थे ये देव और जैसे ही उन्होंने ऑंखें खोली तो सूर्य को ग्रहण लग गया था, यमराज के सगे छोटे भाई है ये. यमराज तो मरने के बाद मनुष्य के इस जन्म के कर्मो की सजा देते है लेकिन ये उसने भी आगे है, ये मनुष्य के पिछले जन्म के और इस जन्म के पापो का भी न्याय करते है और उचित सजा भी देते है.
ये है सूर्यपुत्र शनि देव जो की नवग्रहों में भी शुमार है, भगवान कृष्ण के ससुर इस लिहाज से क्योंकि इनकी भतीजी कालिंदी जो की यमराज की बेटी है की शादी द्वापर में विष्णु के अवतार कृष्ण से हुई थी. इस लिहाज से चचेरे ही सही पर कृष्ण के ससुर है ये, एक प्रहर से लेके साढ़े सात वर्षो तक लगती है इनकी महा दशा.
रामायण काल में रावण ने उन्हें अपने पर न लगने से रोकने के लिए अपनी जेल में बंदी बना लिया था तब उन्होंने शिव का ध्यान किया. इस पर हनुमान ने लंका दहन के समय उन्हें छुड़वाया और तभी से लगी थी उनकी दशा रावण को, अपने पे उपकार के बदले उन्होंने हनुमान को संकट मोचन का ख़िताब दिया और वरदान दिया की उनके भक्त को मैं कभी भी परेशान नही करूँगा.
शनिदेव एक बनिए के सपने में आये और उससे पूछने लगे की में तुझे लगूंगा साढ़े साती का लगूं ये एक प्रहार का, बनिए ने अपनी पत्नी को ये स्वप्न सुनाया तो उसने बनिए को एक प्रहार की दशा लगने को बोलने कहा. ऐसा ही हुआ और बनिया अगले दिन उजाड़ में जाके बैठ गया और शनिदेव का ध्यान करने लगा.
जब कुछ ही समय बाकि था तो बनिया निष्फिक्र हो गांव की तरफ चल दिया, रस्ते में एक खेत में तरबूज देख उसका जी मचला और किसी को न देख उसने एक तरबूज तोडा और वंहा सोने का सिक्का रख दिया. थोड़े दूर जाते ही उसे राजा के सैनिको ने पकड़ लिया था, उसकी तलाशी में तरबूज की जगह राजकुमार का सर कटा मिला
बनिए ने राजा से मरते हुए की इच्छा पूछने बोला और मरने से पहले उसने शनिस्त्रोत बोलने की इच्छा जाहिर की, बनिए ने धीरे धीरे मन ही मन में उसे कहा. इस दौरान उसकी दशा पूर्ण हुई और राजकुमार वन से शिकार खेल के लौट आया ऐसे बनिए की जान तो बची लेकिन पूरी गले में आके.
शनि दे की कृपा प्राप्ति के लिए क्या करें? हनुमान के भक्त बने और शनि को तिल्ली का तेल चढ़ाये, और ऐसे कर्मो से बचे जिनकी सजा देने के लिए शनि को आपको दण्डित करना पड़े

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