शिव शंकर चाहे
तो सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड के अनमोल से अनमोल
वस्तु वस्त्र और रत्नों को धारण कर सकते है, लेकिन शिव का श्रृंगार होता है भस्म से.आखिर ऐसा क्या कारण
है कि महादेव अपने तन पर भस्म रमाये रहते है और क्या चमत्कार करती है ये भस्म?पुराणों और शास्त्रों के अनुसार ब्रह्मा,
विष्णु और महेश सृष्टि के रचियेता,पालनकर्ता और संहारक है. सतयुग त्रेतायुग,
द्वापर युग और कलियुग इन चार युगों के पूरा
होने पर सृष्टि का एक चक्र पूरा हो जाता है.इस चक्र के पूरा होने के बाद महादेव
सृष्टि का संहार कर देते है.संहार होने के बाद ब्रह्मा फिर से एक बार नए सिरे से
सृष्टि की रचना करते है. भस्म शिव द्वारा सृष्टि के संहार का प्रतीक होता है.भस्म
या राख का मतलब है कि सृष्टि का अंत रख हो जाना ही है.इसीलिए शिव भस्म को अपने बदन
पर रमाये रहते है. भस्म सृष्टि का प्रतेक चिन्ह है. यही कारण है कि दूध और जल आदि
से अभिषेक करने के बाद भी शिव को भस्म लगाई जाती है.आइये आपको बताते है कि किस
प्रकार ये चमत्कारिक भस्म बनायी जाती है.महादेव के श्रृंगार के लिए भस्म भी विशेष
रूप से तैयार की जाती है. गाय के गोबर के कंडे, पीपल, बेर, अमलतास, बरगदऔर पलाश की लकड़ियों को जलाकर मंत्रोच्चार किया जाता है.इन
सबके जलने के बाद जो राख प्राप्त होती है उसे छान कर भस्म अलग कर ली जाती है.इसी
भस्म से शिव का श्रृंगार किया जाता है. शिव के लिए तैयार की गयी भस्म को अगर कोई लगता
है तो उसे भी बहुत लाभ होता है. भस्म लगाने से आकर्षण में वृद्धि होती है. सुख
सुविधा की प्राप्ति होती है. शिव भस्म का तिलक लगाने से मन में शांति आती है.भस्म
लगाने का विज्ञानिक महत्व भी है. भस्म से चीज़ें शुद्ध हो जाती है. भस्म के उपयोग
से कीटाणु नष्ट हो जाते है. भस्म लगाने से प्रतिकूल वातावरण में शरीर का तापमान
नियंत्रण में रहता है. ये भी कहा जाता है कि शिव भस्म का तिलक लगाने से पापों से
मुक्ति मिलती है और सब कष्ट भी दूर हो जाते है.देखा आपने शिव की भस्म का तिलक
लगाने के पीछे आध्यात्मिक के साथ साथ वैज्ञानिक कारण भी है.
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