Tuesday, 21 July 2015

अस्त्र-शस्त्र Hindu Mythology Weapons



श्रीराम और रावण का युद्ध हो या महाभारत युद्ध, पुराने समय के सभी युद्धों में कई प्रकार के अस्त्रों और शस्त्रों का उपयोग किया जाता था। अस्त्र और शस्त्र, दोनों ही अलग-अलग चीजें हैं। आमतौर पर तलवार, चक्र, गदा, भाला, ब्रह्मास्त्र आदि अस्त्र-शस्त्र का जिक्र किया जाता है, लेकिन इनके अलावा और भी कई अस्त्र-शस्त्र थे, जिनका उपयोग युद्ध में किया जाता था। यहां जानिए अस्त्र-शस्त्र से जुड़ी खास बातें...
किसे कहते हैं अस्त्र
अस्त्रों को दूर से ही शत्रुओं पर फेंका जाता था। ये मंत्रों से भी उत्पन्न किए जाते थे जैसे ब्रह्मास्त्र। हाथ से फेंका जाने वाला अस्त्र है भाला। कुछ अस्त्र यंत्रों की तरह भी होते थे जैसे धनुष-बाण।
किस कहते हैं शस्त्र
शस्त्र वे थे, जिनकी मदद से शत्रुओं पर करीब से प्रहार किया जाता था। ये बहुत खतरनाक हथियार थे। शस्त्र जैसे तलवार, गदा, त्रिशूल, फरसा, खंजर आदि।
धनुष-बाण का उपयोग करते हुए मंत्रों की मदद से यौद्धा कौन-कौन से अस्त्र उत्पन्न करते थे-
अग्नि बाण: यह बाण बहुत विस्फोटक था। इस बाण के उपयोग से बारिश की तरह आग बरसती थी। जिससे सब कुछ भस्म हो जाता था। इस अस्त्र से बचने के लिए पर्जन्य बाण छोड़ा जाता था।
पर्जन्य बाण: पर्जन्य बाण के उपयोग से भयंकर बारिश होती थी। इस बाण की मदद से शत्रु के अग्नि बाण को शांत किया जाता था।
वायव्य बाण: इस बाण की मदद से भयंकर तूफान उत्पन्न हो जाता था।
पन्नग बाण: इस बाण से सांप ही सांप पैदा हो जाते थे, जिन्हें शत्रु की सेना पर छोड़ा जाता था।
गरुड़ बाण: जब सामने वाला शत्रु पन्नग बाण छोड़ता था तो उससे बचने के लिए गरुड़ बाण छोड़ा जाता था। गरुड़ बाण से गरुड़ उत्पन्न होते थे जो सांपों को खा जाते थे।

धनुष-बाण से उत्पन्न होने वाले महाअस्त्र
ब्रह्मास्त्र- इस अस्त्र का नाम आज भी काफी लोग जानते हैं। ब्रह्मास्त्र ब्रह्माजी का अस्त्र है। यह बहुत शक्तिशाली अस्त्र था। इसे रोकने की शक्ति सिर्फ दूसरे ब्रह्मास्त्र में ही थी।
वैष्णव- ये भगवान विष्णु का अस्त्र है। इस बाण से बचने का सिर्फ एक ही रास्ता था कि शत्रु सभी अस्त्र-शस्त्र छोड़कर आत्म-समर्पण कर दे, तभी इस बाण को रोका जा सकता था।
पाशुपत अस्त्र: ये शिवजी का अस्त्र है। इस अस्त्र में इतनी शक्ति है कि इसे छोड़ने पर पूरा विश्व ही खत्म हो सकता है। महाभारत के समय ये अस्त्र सिर्फ अर्जुन के पास ही था।

ये हैं कुछ खास शस्त्र
गदा- ये बहुत प्रसिद्ध शस्त्र है। महाभारत में भीम और दुर्योधन, दोनों का ही प्रिय शस्त्र गदा ही था। हनुमानजी का भी प्रिय शस्त्र गदा ही है। गदा का हत्था पतला और ऊपरी भाग भारी होता है। लंबाई भी अधिक होती है।
वज्र- देवराज इंद्र का मुख्य शस्त्र वज्र है। इसके ऊपरी हिस्से में तीन भाग टेढ़े बने होते हैं। बीच का हिस्सा पतला और हत्था भारी होता है।
त्रिशूल- भगवान शिव का प्रिय शस्त्र है। इसके ऊपरी हिस्से पर तीन शूल होते हैं, इसीलिए इसे त्रिशूल कहते हैं। इसके हत्थे की लंबाई काफी अधिक होती है।
फरसा- यह कुल्हाड़ी का ही बड़ा रूप है। परशुराम का प्रिय शस्त्र फरसा ही है।

तलवार- तलवार सबसे प्रसिद्ध शस्त्र है। तलवार का हत्था छोटा, लेकिन ऊपरी भाग धारदार और लंबा होता है। इसके लगते ही शत्रु का अंत हो सकता है।
तोमर- तोमर बाण की तरह दिखाई देता है। इसका धड़ लकड़ी का होता है और मुंह लोहे का होता है। कई ग्रंथों में इस शस्त्र का वर्णन दिया गया है।
चन्द्रहास- चंद्रहास रावण का प्रिय शस्त्र था। रावण की तपस्या से प्रसन्न होकर शिवजी ने उसे दिया था। चंद्रहास टेढ़ी तलवार की तरह दिखाई देता था। इसका आकार आधे चंद्रमा के जैसा होता है।

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