प्रत्येक
महीने की दोनों
त्रयोदशी तिथि को
भगवान शिव को
प्रसन्न करने के
लिए प्रदोष व्रत
किया जाता है।
जब त्रयोदशी तिथि
मंगलवार को आती
है तो भौम
प्रदोष का योग
बनता है, जब
शनिवार को आती
है तो शनि
प्रदोष का योग
बनता है। आज
(23 नवंबर) प्रदोष व्रत सोमवार
को होने के
कारण सोम प्रदोष
का शुभ योग
बन रहा है।
सोमवार
को प्रदोष तिथि
होने से इस
दिन भगवान शिव
का पूजन करने
का विशेष महत्व
है क्योंकि सोमवार
व प्रदोष तिथि,
दोनों ही भगवान
शिव की पूजा
के लिए बहुत
ही शुभ मानी
गई हैं। इस
शुभ योग में
भगवान शिव को
प्रसन्न करने के
लिए कुछ कुछ
विशेष उपाय भी
किए जा सकते
हैं। शिवपुराण के
अनुसार, भगवान शिव को
प्रसन्न करने के
उपाय इस प्रकार
हैं-
1. भगवान शिव को
चावल चढ़ाने से
धन की प्राप्ति
होती है।
2. तिल चढ़ाने से पापों
का नाश हो
जाता है।
3. जौ अर्पित करने से
सुख में वृद्धि
होती है।
4. गेहूं चढ़ाने से संतान
वृद्धि होती है।
यह सभी अन्न
भगवान को अर्पण
करने के बाद
गरीबों में बांट
देना चाहिए।
शिवपुराण के अनुसार, जानिए भगवान शिव को कौन-सा रस (द्रव्य) चढ़ाने से क्या फल मिलता है-
1.
बुखार होने
पर भगवान
शिव को
जल चढ़ाने
से शीघ्र
लाभ मिलता
है। सुख
व संतान
की वृद्धि
के लिए
भी जल
द्वारा शिव
की पूजा
उत्तम बताई
गई है।
2. तेज दिमाग के लिए शक्कर मिला दूध भगवान शिव को चढ़ाएं।
3. शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ाया जाए तो सभी आनंदों की प्राप्ति होती है।
4. शिव को गंगा जल चढ़ाने से भोग व मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।
5. शहद से भगवान शिव का अभिषेक करने से टीबी रोग में आराम मिलता है।
6. यदि शारीरिक रूप से कमजोर कोई व्यक्ति भगवान शिव का अभिषेक गाय के शुद्ध घी से करे तो उसकी कमजोरी दूर हो सकती है।
2. तेज दिमाग के लिए शक्कर मिला दूध भगवान शिव को चढ़ाएं।
3. शिवलिंग पर गन्ने का रस चढ़ाया जाए तो सभी आनंदों की प्राप्ति होती है।
4. शिव को गंगा जल चढ़ाने से भोग व मोक्ष दोनों की प्राप्ति होती है।
5. शहद से भगवान शिव का अभिषेक करने से टीबी रोग में आराम मिलता है।
6. यदि शारीरिक रूप से कमजोर कोई व्यक्ति भगवान शिव का अभिषेक गाय के शुद्ध घी से करे तो उसकी कमजोरी दूर हो सकती है।
शिवपुराण के अनुसार, जानिए भगवान शिव को कौन-सा फूल चढ़ाने से क्या फल मिलता है-
1.
लाल व सफेद
आंकड़े के
फूल से
भगवान शिव
का पूजन
करने पर
मोक्ष की
प्राप्ति होती
है।
2. चमेली के फूल से पूजन करने पर वाहन सुख मिलता है।
3. अलसी के फूलों से शिव का पूजन करने पर मनुष्य भगवान विष्णु को प्रिय होता है।
4. शमी वृक्ष के पत्तों से पूजन करने पर मोक्ष प्राप्त होता है।
5. बेला के फूल से पूजन करने पर सुंदर व सुशील पत्नी मिलती है।
6. जूही के फूल से भगवान शिव का पूजन करें तो घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती।
2. चमेली के फूल से पूजन करने पर वाहन सुख मिलता है।
3. अलसी के फूलों से शिव का पूजन करने पर मनुष्य भगवान विष्णु को प्रिय होता है।
4. शमी वृक्ष के पत्तों से पूजन करने पर मोक्ष प्राप्त होता है।
5. बेला के फूल से पूजन करने पर सुंदर व सुशील पत्नी मिलती है।
6. जूही के फूल से भगवान शिव का पूजन करें तो घर में कभी अन्न की कमी नहीं होती।
7. कनेर
के फूलों
से भगवान
शिव का
पूजन करने
से नए
वस्त्र मिलते
हैं।
8. हरसिंगार के फूलों से पूजन करने पर सुख-सम्पत्ति में वृद्धि होती है।
9. धतूरे के फूल से पूजन करने पर भगवान शंकर सुयोग्य पुत्र प्रदान करते हैं, जो कुल का नाम रोशन करता है।
10. लाल डंठलवाला धतूरा शिव पूजन में शुभ माना गया है।
11. दूर्वा से भगवान शिव का पूजन करने पर आयु बढ़ती है।
8. हरसिंगार के फूलों से पूजन करने पर सुख-सम्पत्ति में वृद्धि होती है।
9. धतूरे के फूल से पूजन करने पर भगवान शंकर सुयोग्य पुत्र प्रदान करते हैं, जो कुल का नाम रोशन करता है।
10. लाल डंठलवाला धतूरा शिव पूजन में शुभ माना गया है।
11. दूर्वा से भगवान शिव का पूजन करने पर आयु बढ़ती है।
आमदनी बढ़ाने के लिए
सोम प्रदोष
के योग
में घर
में पारद
शिवलिंग की
स्थापना करें
और उसकी
यथा विधि
पूजन करें।
इसके बाद
नीचे लिखे
मंत्र का
108 बार जप
करें-
ऐं ह्रीं श्रीं ऊं नम: शिवाय: श्रीं ह्रीं ऐं
प्रत्येक मंत्र के साथ बिल्वपत्र पारद शिवलिंग पर चढ़ाएं। बिल्वपत्र के तीनों दलों पर लाल चंदन से क्रमश: ऐं, ह्री, श्रीं लिखें। अंतिम 108 वां बिल्वपत्र को शिवलिंग पर चढ़ाने के बाद निकाल लें तथा उसे अपने पूजन स्थान पर रखकर प्रतिदिन उसकी पूजा करें। माना जाता है ऐसा करने से व्यक्ति की आमदानी में इजाफा होता है।
ऐं ह्रीं श्रीं ऊं नम: शिवाय: श्रीं ह्रीं ऐं
प्रत्येक मंत्र के साथ बिल्वपत्र पारद शिवलिंग पर चढ़ाएं। बिल्वपत्र के तीनों दलों पर लाल चंदन से क्रमश: ऐं, ह्री, श्रीं लिखें। अंतिम 108 वां बिल्वपत्र को शिवलिंग पर चढ़ाने के बाद निकाल लें तथा उसे अपने पूजन स्थान पर रखकर प्रतिदिन उसकी पूजा करें। माना जाता है ऐसा करने से व्यक्ति की आमदानी में इजाफा होता है।
संतान प्राप्ति के लिए उपाय
आज सुबह
जल्दी उठकर
स्नान आदि
करने के
बाद भगवान
शिव का
पूजन करें।
इसके पश्चात
गेहूं के
आटे से
11 शिवलिंग बनाएं।
अब प्रत्येक
शिवलिंग का
शिव महिम्न
स्त्रोत से
जलाभिषेक करें।
इस प्रकार
11 बार जलाभिषेक
करें। उस
जल का
कुछ भाग
प्रसाद के
रूप में
ग्रहण करें।
यह प्रयोग लगातार 21 दिन तक करें। गर्भ की रक्षा के लिए और संतान प्राप्ति के लिए गर्भ गौरी रुद्राक्ष भी धारण करें। इसे किसी शुभ दिन शुभ मुहूर्त देखकर धारण करें।
यह प्रयोग लगातार 21 दिन तक करें। गर्भ की रक्षा के लिए और संतान प्राप्ति के लिए गर्भ गौरी रुद्राक्ष भी धारण करें। इसे किसी शुभ दिन शुभ मुहूर्त देखकर धारण करें।
बीमारी ठीक करने के लिए उपाय
आज पानी में
दूध व काले
तिल डालकर शिवलिंग
का अभिषेक करें।
अभिषेक के लिए
तांबे के बर्तन
को छोड़कर किसी
अन्य धातु के
बर्तन का उपयोग
करें। अभिषेक करते
समय ऊं जूं
स: मंत्र का
जाप करते रहें।
इसके बाद भगवान
शिव से रोग
निवारण के लिए
प्रार्थना करें और
प्रत्येक सोमवार को रात
में सवा नौ
बजे के बाद
गाय के सवा
पाव कच्चे दूध
से शिवलिंग का
अभिषेक करने का
संकल्प लें। इस
उपाय से बीमारी
ठीक होने में
लाभ मिलता है।
इस विधि से करें सोम प्रदोष व्रत
- प्रदोष व्रत में बिना जल पीए व्रत रखना होता है। सुबह स्नान करके
भगवान शंकर, पार्वती और नंदी को पंचामृत व गंगाजल से स्नान कराकर बेल पत्र,
गंध, चावल, फूल, धूप, दीप, भोग, फल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची भगवान शिव
को चढ़ाएं।
- शाम के समय पुन: स्नान करके इसी तरह शिवजी की पूजा करें। शिवजी का षोडशोपचार पूजा करें, जिसमें भगवान शिव की सोलह सामग्री से पूजा करें। भगवान शिव को घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग लगाएं।
- आठ दीपक आठ दिशाओं में जलाएं। आठ बार दीपक रखते समय प्रणाम करें। शिव आरती करें। शिव स्त्रोत, मंत्र जप करें। रात्रि में जागरण करें।
इस प्रकार सभी मनोकामनाएं की पूर्ति और कष्टों से मुक्ति के लिए प्रदोष व्रत करना चाहिए।
- शाम के समय पुन: स्नान करके इसी तरह शिवजी की पूजा करें। शिवजी का षोडशोपचार पूजा करें, जिसमें भगवान शिव की सोलह सामग्री से पूजा करें। भगवान शिव को घी और शक्कर मिले जौ के सत्तू का भोग लगाएं।
- आठ दीपक आठ दिशाओं में जलाएं। आठ बार दीपक रखते समय प्रणाम करें। शिव आरती करें। शिव स्त्रोत, मंत्र जप करें। रात्रि में जागरण करें।
इस प्रकार सभी मनोकामनाएं की पूर्ति और कष्टों से मुक्ति के लिए प्रदोष व्रत करना चाहिए।
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