Wednesday, 18 November 2015

इस रविवार शुक्ल पक्ष की देवप्रबोधिनी एकादशी को न करें ये 11 काम



धर्म ग्रंथों के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवप्रबोधिनी एकादशी कहते हैं। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु नींद से उठते हैं। इस बार ये पर्व 22 नवंबर, रविवार को है। वैसे तो प्रत्येक हिंदू महीने में दो एकादशी आती है, लेकिन देवप्रबोधिनी एकादशी का महत्व बहुत अधिक माना गया है। धर्म ग्रंथों के अनुसार, एकादशी तिथि पर कुछ विशेष काम नहीं करना चाहिए। ये काम कौन से हैं, इसकी जानकारी इस प्रकार है-
1. पान खाना
2.
जुआ खेलना
3.
रात में सोना
4.
दातून करना
5.
परनिंदा (दूसरों की बुराई करना)
6.
चोरी करना
7.
चुगली करना
8.
हिंसा करना
9.
क्रोध करना
10.
स्त्री संग
11.
झूठ बोलना
1. पान खाना
एकादशी तिथि पर पान नहीं खाना चाहिए। पान खाना राजसी प्रवृत्ति का प्रतीक है। जबकि एकादशी पर मन में सात्विक भाव रहना चाहिए। इसलिए एकादशी पर पान खा कर व्यक्ति को सात्विक आचार-विचार रख प्रभु भक्ति में मन लगाना चाहिए।

2. जुआ खेलना
जुआ खेलना एक सामाजिक बुराई है। जो व्यक्ति जुआ खेलता है, उसका परिवार कुटुंब भी नष्ट हो जाता है। जिस स्थान पर जुआ खेला जाता है, वहां अधर्म का राज होता है। ऐसे स्थान पर अनेक बुराइयां उत्पन्न होती हैं। इसलिए सिर्फ एकादशी ही नहीं बल्कि कभी भी जुआ नहीं खेलना चाहिए।
3. रात में सोना
एकादशी की रात को सोना नहीं चाहिए। पूरी रात जागकर भगवान विष्णु की भक्ति करनी चाहिए। भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर के निकट बैठकर भजन करते हुए ही जागरण करना चाहिए। इससे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
4. दातून करना
एकादशी पर दातून (मंजन) करने की भी मनाही है।
5. परनिंदा (दूसरों की बुराई करना)
परनिंदा यानी दूसरों की बुराई करना। ऐसा करने से मन में दूसरों के प्रति कटु भाव सकते हैं। इसलिए एकादशी के दिन दूसरों की बुराई करते हुए भगवान विष्णु का ही ध्यान करना चाहिए।
6. चोरी करना
चोरी करना पाप कर्म माना गया है। चोरी करने वाला व्यक्ति परिवार समाज में नफरत की नजरों से देखा जाता है। इसलिए सिर्फ एकादशी ही नहीं अन्य दिनों में भी चोरी जैसा पाप कर्म नहीं करना चाहिए।
7. चुगली करना
चुगली करने से मान-सम्मान में कमी सकती है। कई बार अपमान का सामना भी करना पड़ सकता है। इसलिए सिर्फ एकादशी ही नहीं अन्य दिनों में भी किसी की चुगली नहीं करना चाहिए।
8. हिंसा करना
एकादशी के दिन हिंसा करने की मनाही है। हिंसा केवल शरीर से ही नहीं मन से भी होती है। इससे मन में विकार आता है। इसलिए शरीर या मन किसी भी प्रकार की हिंसा इस दिन नहीं करनी चाहिए।
9. क्रोध
धर्म ग्रंथों के अनुसार, एकादशी तिथि पर क्रोध भी नहीं करना चाहिए। इससे मानसिक हिंसा होती है। अगर किसी से कोई गलती हो भी जाए तो उसे माफ कर देना चाहिए और मन शांत रखना चाहिए।
9. स्त्रीसंग
एकादशी तिथि बहुत ही पवित्र है। इस दिन मन में किसी भी प्रकार का विकार नहीं आना चाहिए। इस दिन स्त्रीसंग नहीं करना चाहिए साथ ही इस विषय के बारे में सोचना भी नहीं चाहिए। इस विषय पर सोचने से भी मन विचलित होता है और भगवान भक्ति में मन नहीं लगता।
11. झूठ बोलना
झूठ बोलना व्यक्तिगत बुराई है। जो लोग झूठ बोलते हैं, उन्हें समाज परिवार में उचित मान-सम्मान नहीं मिलता। इसलिए सिर्फ एकादशी पर ही नहीं अन्य दिनों में भी झूठ नहीं बोलना चाहिए।


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